Opinion

NH-139 बना मौत का हाईवे: आखिर कब जागेगी सरकार?

हर दिन बुझ रहा किसी न किसी घर का चिराग

Admin ·3 min read ·July 15, 2026 ·2 views
औरंगाबाद/अरवल। राष्ट्रीय राजमार्ग NH-139 पर लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। आए दिन किसी न किसी परिवार का सदस्य सड़क हादसे का शिकार हो रहा है। यह सड़क अब लोगों के बीच "मौत का हाईवे" के नाम से चर्चित होने लगी है। हाल के दिनों में भी NH-139 पर कई गंभीर हादसे सामने आए हैं, जिनमें लोगों की जान गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क पर तेज रफ्तार, अपर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था, खतरनाक मोड़, अतिक्रमण, ओवरलोड वाहनों की आवाजाही और प्रभावी ट्रैफिक निगरानी की कमी दुर्घटनाओं की बड़ी वजह बन रही है। सवाल यह है कि जब आए दिन लोगों की जान जा रही है, तब भी इस सड़क को सुरक्षित बनाने के लिए ठोस और तेज़ कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे? बिहार में सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए सरकार और संबंधित एजेंसियां गश्त, स्पीड मॉनिटरिंग, ई-चालान और दुर्घटना विश्लेषण जैसी व्यवस्थाओं पर काम कर रही हैं। साथ ही iRAD प्रणाली के माध्यम से दुर्घटनाओं का डेटा जुटाकर सुधारात्मक कदमों की योजना बनाई जा रही है। फिर भी स्थानीय स्तर पर लोगों की मांग है कि NH-139 के संवेदनशील हिस्सों पर तत्काल सुरक्षा उपाय लागू किए जाएं। स्थानीय लोगों की प्रमुख मांगें दुर्घटना संभावित स्थलों की पहचान कर तत्काल सुधार। स्पीड कैमरे और नियमित पुलिस गश्त। डिवाइडर, स्ट्रीट लाइट और स्पष्ट संकेतक बोर्ड। अवैध कट और अतिक्रमण पर सख्त कार्रवाई। एंबुलेंस और ट्रॉमा सुविधा की बेहतर उपलब्धता। जनता का सवाल "आखिर कब तक NH-139 पर हर दिन किसी परिवार का चिराग बुझता रहेगा? क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार है, या फिर सरकार समय रहते इस सड़क को सुरक्षित बनाने के लिए निर्णायक कदम उठाएगी?" यह केवल सड़क का नहीं, बल्कि हजारों परिवारों की सुरक्षा और जीवन का सवाल है।